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।। अखण्ड भारत।।

"अखंड " भारत का इतिहास लिखने में कई तरह की बातों को शामिल किया जा सकता है। सर्व प्रथम तो उसकी निष्पक्षता के लिए जरूरी है पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर उसके बारे में बगैर किसी भेदभाव के सोचा जाए, जो प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य हो सकता है और जो किसी भी जाति, धर्म और समुदाय से हो सकता है। भारतीय हो तो यह स्वीकारना जरूरी है कि हम भी भारत के इतिहास के हिस्से हैं। हमारे पूर्वज ब्रह्मा, मनु, ययाति, राम और कृष्ण ही थे। इतिहास में उन लोगों के इतिहास का उल्लेख हो जिन्होंने इस देश को बनाया, कुछ खोजा, अविष्कार किए या जिन्होंने देश और दुनिया को कुछ दिया। जिन्होंने इस देश की एकता और अखंडता को कायम रखा। यहां प्रस्तुत है अखंड भारत के बारे में संक्षिप्त बातें।

”सुदर्शनं प्रवक्ष्यामि द्वीपं तु कुरुनन्दन।
परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः॥
यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः।
एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले॥
द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्।।-
                         (वेदव्यास, भीष्म पर्व, महाभारत)

हिन्दी अर्थ : हे कुरुनन्दन! सुदर्शन नामक यह द्वीप चक्र की भांति गोलाकार स्थित है, जैसे पुरुष दर्पण में अपना मुख देखता है, उसी प्रकार यह द्वीप चन्द्रमण्डल में दिखाई देता है। इसके दो अंशों में पिप्पल और दो अंशों में महान शश (खरगोश) दिखाई देता है।

अर्थात : दो अंशों में पिप्पल का अर्थ पीपल के दो पत्तों और दो अंशों में शश अर्थात खरगोश की आकृति के समान दिखाई देता है।

आप कागज पर पीपल के दो पत्तों और दो खरगोश की आकृति बनाइए और फिर उसे उल्टा करके देखिए, आपको धरती का मानचित्र दिखाई देखा। यह श्लोक 5 हजार वर्ष पूर्व लिखा गया था। इसका मतलब लोगों ने चंद्रमा पर जाकर इस धरती को देखा होगा तभी वह बताने में सक्षम हुआ होगा कि ऊपर से समुद्र को छोड़कर धरती कहां-कहां नजर आती है और किस तरह की।

पहले संपूर्ण हिन्दू धर्म जम्बू द्वीप पर शासन करता था। फिर उसका शासन घटकर भारतवर्ष तक सीमित हो गया। फिर कुरुओं और पुरुओं की लड़ाई के बाद आर्यावर्त नामक एक नए क्षेत्र का जन्म हुआ जिसमें आज के हिन्दुस्थान के कुछ हिस्से, संपूर्ण पाकिस्तान और संपूर्ण अफगानिस्तान का क्षेत्र था। लेकिन मध्यकाल में लगातार आक्रमण, धर्मांतरण और युद्ध के चलते अब घटते-घटते सिर्फ हिन्दुस्तान बचा है।

यह कहना सही नहीं होगा कि पहले हिन्दुस्थान का नाम भारतवर्ष था और उसके भी पूर्व जम्बू द्वीप था। कहना यह चाहिए कि आज जिसका नाम हिन्दुस्तान है वह भारतवर्ष का एक टुकड़ा मात्र है। जिसे आर्यावर्त कहते हैं वह भी भारतवर्ष का एक हिस्साभर है और जिसे भारतवर्ष कहते हैं वह तो जम्बू द्वीप का एक हिस्सा है मात्र है। जम्बू द्वीप में पहले देव-असुर और फिर बहुत बाद में कुरुवंश और पुरुवंश की लड़ाई और विचारधाराओं के टकराव के चलते यह जम्बू द्वीप कई भागों में बंटता चला गया।

सधन्यवाद

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