Skip to main content

Posts

Showing posts with the label वैदिक गणित

।। त्रिभुज के अन्तर्गत वृत का व्यास (Diameter of Incircle) ।।

।। त्रिभुज अन्तर्गत वृत का व्यास (Diameter of Incircle) ।। भारतीय गणितज्ञ महावीरा (814 - 880 ई.) ने त्रिभुज के अन्तर्गत वृत के व्यास (Diameter) प्राप्त करने के पहली बार सूत्र प्रदान किए हैं — परिधेः पादने भजे...

Historical journey of Pi

Historical journey of Pi  पाई की ऐतिहासिक यात्रा  वृत के परिधि तथा व्यास के अनुपात को पाई के रूप व्यक्त किया जाता है जिसका स्थूल मान 3 है, परिमेय संख्या के रूप में मान   22 /7 तथा 3.1416 है तथा अपरिमेय संख्या के रूप में (10)^½ है। इसकी ऐतिहासिक यात्रा वैदिक काल से प्रारंभ होकर वर्तमान में शोधकर्ताओं के लिए और अधिक शोध करने की प्रेरणा देता रहता है। भारत तथा विश्व के सभी गणितज्ञों वृत के परिधि तथा व्यास के अनुपात में रुचि दिखाई तथा कुछ न कुछ नया खोजने का प्रयास किया है परन्तु भारतीय गणितज्ञों ने गणित के क्षेत्र में जो योगदान दिया वो अविस्मरणीय है। शुल्व-सूत्रों में वृत-संरचना के लिए अनेक नियम निर्धारित किये गये हैं। उनके अनेक विवरणों से पाई के अनेक प्रायः समतुल्य मान ध्वनित होते हैं। शुल्व-सूत्र के पूर्वोक्त उदाहरण से पाई का मान 3. 004 का अनुमान लगाया गया है। मानव शुल्बसूत्र  ( 1800 ई. पू.) से यह मान 3. 1604 द्योतित हुआ है। पाई का स्थूल मान 3 के लिए — यूपावटाः पदविष्कम्भाः। त्रिपदपरिणाहानि यूपोपराणि।।       ...