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Showing posts from 2019

भारतीय गणितज्ञ - भास्कराचार्य (प्रथम)

भारतीय गणितज्ञ - भास्कराचार्य (प्रथम) भारत के प्राचीन गणितज्ञ भास्कराचार्य (प्रथम) का जन्म महाराष्ट्र राज्य के परभानी जिला के बोरी गाँव में 570 ई.  में हुआ था। भास्कराचार्य ...

प्राचीन भारतीय गणितज्ञ - महावीराचार्य

महावीराचार्य महावीराचार्य दिगम्बर जैन शाखा के प्रमुख गणितज्ञ थे। इनका जन्म काल 9 वीं शताब्दी माना जाता है। इनका निवास स्थान कर्नाटक प्रांत में थ। राष्ट्रकूट वंश के राजा अमोघवर्ष (815-877 ई) के राज्य में महावीराचार्य रहते थे। इस काल (850 ई) में ही उन्होंने "गणित सार संग्रह" नामक ग्रंथ की रचना संस्कृत भाषा में की थी। गणित सार संग्रह में 9 अध्याय हैं तथा 1131 श्लोक हैं। गणित-शास्त्र की प्रशंसा करते हुए महावीराचार्य कहते हैं कि       बहुभिर्विप्रलापैः किम् त्रैलोक्ये सचराचरे ।       यत्किंचिद्वस्तु तत्सर्व गणितेन बिना न हि।। अर्थात् गणित के बारे में बहुत क्या कहना, तीनो लोकों में सचराचर (चेतन और जड़) जगत में जो भी वस्तु विद्यमान हैं वे सभी गणित के बिना संभव नहीं हैं। महावीराचार्य का योगदान 1. लघुतम समापवर्त्य(L.C.M.) ज्ञात करने की विधि देने वाले महावीराचार्य विश्व के प्रथम गणितज्ञ थे    छेदापर्वकानां लब्धनां चाहतौ निरुद्ध स्यात्।   हरहृत निरुद्धगुणिते हारांशगुणे समो हारः।।       ...

Ganak Chakra Churnamarni Acharya Brahmagupta |गणक चक्र चुणामणी आचार्य ब्रह्मगुप्त |

Acharya Brahmagupta  ब्रह्मगुप्त का जन्म 598 ई अर्थात् 520 शक संवत् (541 वि. सं.) में हुआ था। इनका जन्म स्थान भिनमाल, माउण्ट आबू , राजस्थान में हैं। यह गुजरात सीमा से लगा हुआ है। ब्रह्मगुप्त उज्जैन गुरुकुल के प्रमुख खगोल शास्त्री थे। उन्होंने 30 वर्ष की आयु में 628 ई में "ब्रह्मस्फूट-सिद्धांत" नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की। ब्रह्मस्फूट-सिद्धांत भारतीय खगोल शास्त्र का प्रामाणिक एवं मानक ग्रंथ है। इस ग्रंथ में 24 अध्याय हैं। 12वें अध्याय को गणिताध्याय नाम दिया है, अर्थात इसमें अंक गणित (arithmetic) तथा छाया गणित आदि पर सामग्री दी गई है। 18 वें अध्याय को कुट्टकाध्याय नाम दिया है। इसमें बीजगणित (algebra) अनिर्धार्य रैखिक एवं वर्ग समीकरण के हल दिये हैं। इसके अध्याय - 2 में त्रिकोणमिति (trigonometry) पर कार्य किया गया है। इस ग्रंथ के अलावा इनका "खण्डखाद्यकम्" नामक करण ग्रंथ उपलब्ध है। इसमें विशेषकर अंतर्वेशन (Interpolation) तथा समतल त्रिकोणमिति (Plane Trigonometry) एवं गोलीय त्रिकोणमिति (Spherical Trigonometry) दोनों में sine (ज्या) और cosine (कोटिज्या) ...

परिचय (Introduction) - भारतीय विज्ञान परंपरा (Bhartiya Vigyan Prampara)

।। भारतीय विज्ञान परंपरा।। भारतवर्ष में वैज्ञानिक दृष्टि से अध्ययन-अनुसंधान की परंपरा वैदिक काल से है। अनेकों ऋषि-मुनियों तथा मनीषियों ने इसके लिए अपने अमूल्य जीवन का ...

नारायण पंडित |Narayana Pandit |

।। भारतीय गणितज्ञ-नारायण पंडित (01) ।। केरला के महान गणितज्ञ जिनका कार्यकाल 1325 ई. से 1400 ई. के बीच रहा। इनके पिता का नाम नरसिम्हा था। आर्यभट्ट तथा भास्कराचार्य - ।। से प्रभावित हो कर गणित के विभिन्न क्षेत्रों में अनुपम योगदान दिया, इन्होंने अंकगणित, बीज-गणित, ज्यामिती, जादूई-वर्ग इत्यादि अनेक विषयों पर कार्य किया है। सन् 1356 ई. में इन्होंने गणित कौमुदी की रचना की साथ ही भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा रचित लीलावती के उपर टिप्पणी 'कर्मप्रदीपिका' की रचना की। विभिन्न क्षेत्रों में आपके द्वारा किये गये कुछ कार्य —    ~ अंकगणित — इसके अन्तर्गत आपने वर्ग करने की नई विधि की रचना की थी   (i)  P² = (p + q)² = p² + q² + 2pq         (24)² = (20 + 4)²                  = 20² + 4² + 2×20 × 4                  = 400 + 16 + 160       ...

वराहमिहिर (Varahmihir)

।। वराह मिहिर।। (जन्म-ईस्वी 499- मृत्यु ईस्वी सन् 587) : वराह मिहिर का जन्म उज्जैन के समीप कपिथा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम आदित्यदास था। उन्होंने उनका नाम ‍मिहिर रखा था जिसक...