MANAS GANIT
  • Home
  • ABOUT US
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • PRIVACY POLICY
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • DISCLAIMER
  • CONTACT
    • Childcare
    • Doctors
  • Home
  • भारतीय गणितज्ञ
    • Internet
    • Market
    • Stock
  • भारतीय विज्ञान
    • Dvd
    • Games
    • Software
      • Office
  • वैदिक गणित
    • Child Category 1
      • Sub Child Category 1
      • Sub Child Category 2
      • Sub Child Category 3
    • Child Category 2
    • Child Category 3
    • Child Category 4
  • भारतीय गणित
  • गणितीय समाचार
    • Childcare
    • Doctors
  • Uncategorized

Tuesday, 14 June 2016

।। सक्रियता श्रेणी।।

 June 14, 2016     No comments   

।। सक्रियता श्रेणी।।
धातु की सक्रियता या क्रियाशीलता (Reactivity Series or Activity Series).
कक्षा नवमी और दशमी के बच्चों को हम धातु की सक्रियता या क्रियाशीलता (Reactivity Series or Activity Series of metals) पढाते हैं।
बच्चों को बताते हैं कि किसी अंग्रेज रसायनशास्त्री ने इसको व्यवस्थित करने का काम किया है और इस कार्य के लिए उन्हें फलाना पुरस्कार से सम्मानित किया गया है....
परन्तु यह नहीं बताते कि यह कार्य हमारे देश के ऋषि-मुनियों की अथक प्रयासों तथा अखण्ड तपस्या से सैकड़ों वर्ष पहले ही इस विषय पर अनेकों प्रयोग किये जा चुके थे।
महाऋषि गोविन्दाचार्य ने धातुओं के जंग-रोधन या क्षरण रोधों की क्षमता का क्रम से वर्णन किया है आज भी वही क्रम तथाकथित अंग्रेज वैज्ञानिकों के द्वारा प्रयोग में लाया जाता है एवं बच्चों को पढ़या जाता है।

सुवर्णं रजतं ताम्रं तीक्ष्णवंग भुजङ्गमाः ।
लोहकं षड्विधं तच्च यथापूर्वं तदक्षयम् ।।
                                —रसार्णव - ७ - ८९ - ९०
अर्थात :-
धातुओं के अक्षय रहने का क्रम निम्न प्रकार से है....
सुवर्ण (सोना).... चांदी.... ताम्र (copper).... वंग... सीसा... तथा लोहा। इसमें सोना सबसे अधिक अक्षय है।
उपरोक्त उदाहरण से स्पष्ट है कि दुनिया में यदि कहीं ज्ञान है तो वैदिक साहित्य में ही है आवश्यकता सिर्फ़ इस बात की है कि अपने आप को पहचान कर अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग अपने वैदिक साहित्य तथा वैदिक ज्ञान के विकास में अर्पण करें।
    दुसरे हमारे वैदिक ज्ञान को विकसित कर तथा आकर्षक बना कर हमी से बेच रहे हैं हम यह जानते हुए भी कि यह हमारा ही ज्ञान है उसे खरीदने के लिए मजबूर हैं क्योंकि वर्षों की गुलामी ने हमें पकी-पकाइ खिचड़ी खाने का आदी बना दिया है।
सधन्यवाद
अनिल ठाकुर।।

  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg
Email ThisBlogThis!Share to XShare to Facebook
Newer Post Older Post Home

0 comments:

Post a Comment

Popular Posts

  • ।। भोजन के नियम व रस।।
      ।। भोजन नियम व रस।। हमारे भोजन में 6 रस  होते है । इसीलिए हमारे भोजन को षडरस कहा जाता है ।   १. अम्ल ( खट्टा ) २. मधुर ( मीठा ) ३. लवण ...
  • ।। कलावा (मौली) - एक विज्ञान।।
    कलावा (मौली) क्यों बांधते हैं? मौली बांधना वैदिक परंपरा का हिस्सा है। इसे लोग कलावा भी कहते हैंl यज्ञ के दौरान इसे बांधे जाने की परंपरा तो ...
  • Vedic Ganit A Dance of Numbers
    Vedic Ganit is not merely Mathematics — it is the Dance of Numbers. In ordinary mathematics, numbers are counted. In Vedic Gan...

Blog Archive

  • ►  2026 (7)
    • ►  April (3)
    • ►  March (2)
    • ►  February (2)
  • ►  2019 (6)
    • ►  September (2)
    • ►  March (1)
    • ►  January (3)
  • ►  2018 (10)
    • ►  November (1)
    • ►  October (5)
    • ►  September (1)
    • ►  March (1)
    • ►  February (2)
  • ►  2017 (13)
    • ►  September (2)
    • ►  August (1)
    • ►  May (1)
    • ►  March (6)
    • ►  February (3)
  • ▼  2016 (39)
    • ►  November (2)
    • ►  October (16)
    • ►  September (1)
    • ►  August (4)
    • ►  July (1)
    • ▼  June (15)
      • ।। अनेक-वर्ण-समीकरण।।
      • ।। शून्य।।
      • ।। ऋग्वेद — प्राकृतिक संख्या।।
      • ।। प्राचीन भारतीय आविष्कारक।।
      • ।। गजानन।।
      • ।। देव-भाषा।।
      • ।। अखण्ड भारत।।
      • ।। सम्राट अशोक।।
      • ।। तुलसी।।
      • ।। गति के नियम।।
      • ।। सक्रियता श्रेणी।।
      • ।। महाराणा प्रताप।।
      • ।। पुष्पिताधिकारी।।
      • ।। जय माँ शारदे।।
      • ।। अथ श्री।।

Featured post

The Geometrical Foundations of the Baudhāyana Śulba Sūtras

  Beyond the Formula: 4 Surprising Takeaways from the CCSU Mathematical Syllabus 1. Introduction: The Hidden Heritage of Your Geometry Class...

Popular Posts

  • ।। भोजन के नियम व रस।।
      ।। भोजन नियम व रस।। हमारे भोजन में 6 रस  होते है । इसीलिए हमारे भोजन को षडरस कहा जाता है ।   १. अम्ल ( खट्टा ) २. मधुर ( मीठा ) ३. लवण ...
  • ।। कलावा (मौली) - एक विज्ञान।।
    कलावा (मौली) क्यों बांधते हैं? मौली बांधना वैदिक परंपरा का हिस्सा है। इसे लोग कलावा भी कहते हैंl यज्ञ के दौरान इसे बांधे जाने की परंपरा तो ...
  • Vedic Ganit A Dance of Numbers
    Vedic Ganit is not merely Mathematics — it is the Dance of Numbers. In ordinary mathematics, numbers are counted. In Vedic Gan...

Manas Ganit

मानस-गणित एक अद्भुत प्रयास जो भारतीय ,आधुनिक तथा वैदिक गणित के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए युवा पीढ़ी के सम्पूर्ण व्यक्तित्व के विकास को लक्षित करके गणितीय ज्ञान को सरल तथा रोचक बनाती है।

Copyright © MANAS GANIT | Powered by Blogger
Design by Hardeep Asrani | Blogger Theme by NewBloggerThemes.com