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Showing posts from October, 2018

।। यंत्र विज्ञान - गति का नियम (Mechanics - Laws of Motion) ।।

।। मेकेनिक्स एवं यंत्र विज्ञान।। महान महाऋषि "कणाद" ( 600 ई. पू.) ने अपने वैशेषिक दर्शन में कर्म शब्द का अर्थ Motion से लिया है। आपके अनुसार गति के पाँच प्रकार हैं ; (I)  उत्क्षेपण   (Upward motion) (II) अव...

।। रसायन शास्त्र - सक्रियता श्रेणी (Chemistry - Activity Series) ।।

।। रसायन शास्त्र।। रसायन शास्त्र का सम्बन्ध धातु विज्ञान तथा चिकित्सा विज्ञान से भी है। वर्तमान काल में प्रसिद्ध वैज्ञानिक आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय ने "हिन्दू केमेस्ट्री" ग्रंथ लिख कर कुछ समय से लुप्त शास्त्र को फिर लोगों के सामने लाया। रसायन शास्त्र एक प्रयोगात्मक विज्ञान है। खनिजों, पौधों, कृषिधान्य आदि के द्वारा विविध वस्तुओं का उत्पादन, विभिन्न धातुओं का निर्माण व परस्पर परिवर्तन तथा स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक औषधियों का निर्माण इसके द्वारा होता है। प्राचीन काल के रसायनज्ञ तथा उनकी कृतियाँ :- नागार्जुन - रसरत्नाकर, कक्षपुटतंत्र, आरोग्य मंजरी, योग सार, योगाष्टक वांग्भट्ट - रसरत्न समुच्चय गोविन्दाचार्य - रसार्णव यशोधर - रस प्रकाश सुधाकर रामचंद्र - रसेन्द्र चिंतामणि सोमदेव - रसेन्द्र चूड़ामणि मुख्य रस (Chemical) :- रसरत्न समुच्चय ग्रंथ में निम्न रसायनों का उल्लेख किया गया है। महारस, उपरस, सामान्यरस, रत्न, धातु, विष, क्षार, अम्ल, लवण, लौहभस्म महारस (Main Chemical) :- अभ्रं, वैक्रांत, भाषिक, विमला, शिलाजतु, सास्यक, चपला, रसक उपरस :- गंधक, गैरिक, काशिस, स...

।। वनस्पति शास्त्र - प्रकाश संश्लेषण, कोशिका की खोज (Botany - Photosynthesis, Discovery of cell) ।।

।। वनस्पति शास्त्र।। वैदिक काल से ही भारत वर्ष में प्रकृति के निरीक्षण, परीक्षण एवं विश्लेषण की प्रवृत्ति रही है। अतः इसी प्रक्रिया में वनस्पति जगत का विश्लेषण किया गया...

।। खगोल शास्त्र - प्रकाश की गति (Astronomy - Speed of light)

।। खगोल शास्त्र।। खगोल विज्ञान को वेद का नेत्र कहा गया क्योंकि सम्पूर्ण सृष्टियों में होने वाले व्यवहार का निर्धारण काल से होता है और काल का ज्ञान ग्रहीय गति से होता है। अ...