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परिचय (Introduction) - भारतीय विज्ञान परंपरा (Bhartiya Vigyan Prampara)

।। भारतीय विज्ञान परंपरा।। भारतवर्ष में वैज्ञानिक दृष्टि से अध्ययन-अनुसंधान की परंपरा वैदिक काल से है। अनेकों ऋषि-मुनियों तथा मनीषियों ने इसके लिए अपने अमूल्य जीवन का ...

नारायण पंडित |Narayana Pandit |

।। भारतीय गणितज्ञ-नारायण पंडित (01) ।। केरला के महान गणितज्ञ जिनका कार्यकाल 1325 ई. से 1400 ई. के बीच रहा। इनके पिता का नाम नरसिम्हा था। आर्यभट्ट तथा भास्कराचार्य - ।। से प्रभावित हो कर गणित के विभिन्न क्षेत्रों में अनुपम योगदान दिया, इन्होंने अंकगणित, बीज-गणित, ज्यामिती, जादूई-वर्ग इत्यादि अनेक विषयों पर कार्य किया है। सन् 1356 ई. में इन्होंने गणित कौमुदी की रचना की साथ ही भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा रचित लीलावती के उपर टिप्पणी 'कर्मप्रदीपिका' की रचना की। विभिन्न क्षेत्रों में आपके द्वारा किये गये कुछ कार्य —    ~ अंकगणित — इसके अन्तर्गत आपने वर्ग करने की नई विधि की रचना की थी   (i)  P² = (p + q)² = p² + q² + 2pq         (24)² = (20 + 4)²                  = 20² + 4² + 2×20 × 4                  = 400 + 16 + 160       ...

वराहमिहिर (Varahmihir)

।। वराह मिहिर।। (जन्म-ईस्वी 499- मृत्यु ईस्वी सन् 587) : वराह मिहिर का जन्म उज्जैन के समीप कपिथा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम आदित्यदास था। उन्होंने उनका नाम ‍मिहिर रखा था जिसक...

।। विद्युत शास्त्र - बैटरी (Electricity - Cell) ।।

।। विद्युत शास्त्र।। मिथक बैट्री के आविष्कार का श्रेय ब्रिटिश वैज्ञानिक जॉन फ्रेडरिक डेनियल (1836 AD) को तथा बिजली के आविष्कार का श्रेय बेंजामिन फ्रैंकलिन (1752 AD) को दिया जाता है। ...

।। यंत्र विज्ञान - गति का नियम (Mechanics - Laws of Motion) ।।

।। मेकेनिक्स एवं यंत्र विज्ञान।। महान महाऋषि "कणाद" ( 600 ई. पू.) ने अपने वैशेषिक दर्शन में कर्म शब्द का अर्थ Motion से लिया है। आपके अनुसार गति के पाँच प्रकार हैं ; (I)  उत्क्षेपण   (Upward motion) (II) अव...

।। रसायन शास्त्र - सक्रियता श्रेणी (Chemistry - Activity Series) ।।

।। रसायन शास्त्र।। रसायन शास्त्र का सम्बन्ध धातु विज्ञान तथा चिकित्सा विज्ञान से भी है। वर्तमान काल में प्रसिद्ध वैज्ञानिक आचार्य प्रफुल्लचंद्र राय ने "हिन्दू केमेस्ट्री" ग्रंथ लिख कर कुछ समय से लुप्त शास्त्र को फिर लोगों के सामने लाया। रसायन शास्त्र एक प्रयोगात्मक विज्ञान है। खनिजों, पौधों, कृषिधान्य आदि के द्वारा विविध वस्तुओं का उत्पादन, विभिन्न धातुओं का निर्माण व परस्पर परिवर्तन तथा स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक औषधियों का निर्माण इसके द्वारा होता है। प्राचीन काल के रसायनज्ञ तथा उनकी कृतियाँ :- नागार्जुन - रसरत्नाकर, कक्षपुटतंत्र, आरोग्य मंजरी, योग सार, योगाष्टक वांग्भट्ट - रसरत्न समुच्चय गोविन्दाचार्य - रसार्णव यशोधर - रस प्रकाश सुधाकर रामचंद्र - रसेन्द्र चिंतामणि सोमदेव - रसेन्द्र चूड़ामणि मुख्य रस (Chemical) :- रसरत्न समुच्चय ग्रंथ में निम्न रसायनों का उल्लेख किया गया है। महारस, उपरस, सामान्यरस, रत्न, धातु, विष, क्षार, अम्ल, लवण, लौहभस्म महारस (Main Chemical) :- अभ्रं, वैक्रांत, भाषिक, विमला, शिलाजतु, सास्यक, चपला, रसक उपरस :- गंधक, गैरिक, काशिस, स...

।। वनस्पति शास्त्र - प्रकाश संश्लेषण, कोशिका की खोज (Botany - Photosynthesis, Discovery of cell) ।।

।। वनस्पति शास्त्र।। वैदिक काल से ही भारत वर्ष में प्रकृति के निरीक्षण, परीक्षण एवं विश्लेषण की प्रवृत्ति रही है। अतः इसी प्रक्रिया में वनस्पति जगत का विश्लेषण किया गया...