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।। विद्युत शास्त्र - बैटरी (Electricity - Cell) ।।

।। विद्युत शास्त्र।।
मिथक
बैट्री के आविष्कार का श्रेय ब्रिटिश वैज्ञानिक जॉन फ्रेडरिक डेनियल (1836 AD) को तथा बिजली के आविष्कार का श्रेय बेंजामिन फ्रैंकलिन (1752 AD) को दिया जाता है।
सत्यता:-
महर्षि अगस्त्य एक वैदिक ऋषि थे। ‘अगस्त्य संहिता’ नामक ग्रंथ की रचना की,

बैट्री द्वारा विद्युत उत्पादन (Production of electricity by cell) :-
इस ग्रंथ में विद्युत उत्पादन से संबंधित सूत्र मिलते हैं-
संस्थाप्य मृण्मये पात्रे ताम्रपत्रं सुसंस्कृतम्‌।
छादयेच्छिखिग्रीवेन चार्दाभि: काष्ठापांसुभि:॥
दस्तालोष्टो निधात्वय: पारदाच्छादितस्तत:।
संयोगाज्जायते तेजो मित्रावरुणसंज्ञितम्‌॥
                                           -अगस्त्य संहिता
अर्थात :-
एक मिट्टी का पात्र लें, उसमें ताम्र पट्टिका (Copper Sheet) डालें तथा शिखिग्रीवा (Copper sulphate) डालें, फिर बीच में गीली काष्ट पांसु (wet saw dust) लगाएं, ऊपर पारा (mercury) तथा दस्त लोष्ट (Zinc) डालें, फिर तारों को मिलाएंगे तो उससे मित्रावरुणशक्ति (Electricity) का उदय होगा।
उपर्युक्त वर्णन के आधार पर नागपुर में इंजीनियरिंग के प्राध्यापक श्री पी. पी. होले तथा उनके मित्रों ने  इस आधार पर एक सेल बनाया गया और डिजिटल मल्टीमीटर द्वारा उसको मापा। उसका Open circuit voltage था 1.38 वोल्ट और Short circuit current था 23 मिली एम्पीयर। इस सफल प्रयोग का प्रदर्शन 7 अगस्त 1990 ई. को स्वदेशी विज्ञान संशोधन संस्था नागपुर द्वारा किया गया।
विद्युत अपघटन (Electrolysis of water) :-

विद्युत अपघटन के संदर्भ में ऋषि अगस्त ने कही है कि —
अनेन जलभंगोस्ति प्राणो दानेषु वायुषु ।
एवं शतानां कुंभानांसंयोगकार्यत्स्मृतः।।
                                       अगस्त संहिता
अर्थात् —
सौ कुंभों की शक्ति का पानी पर प्रयोग करेंगे, तो पानी अपने रूप को बदल कर प्राण-वायु तथा उदान-वायु में परिवर्तित हो जायेगा।
वायुबन्धकवस्त्रेण निबद्धो यानमस्तके
उदानः स्वलघुत्वे बिभर्त्याकाशयानकम् ।
               ( अगस्त संहिता शिल्प शास्त्र सार)
अर्थात् —
उदान वायु को वायु प्रतिबन्धक वस्त्र में रोका जाये तो यह विमान विद्या के काम में आता है।

विद्युत के प्रकार (Types of Electricity) :-

अगस्त संहिता एवं अन्य ग्रंथों के आधार पर विद्युत भिन्न भिन्न प्रकार से उत्पन्न होती है उस आधार पर उनके भिन्न भिन्न नाम है—
(1) तड़ित - रेशमी वस्त्र के घर्षण से उत्पन्न,
(2) सौदामिनी - रत्नों के घर्षण से उत्पन्न,
(3) विद्युत - बादलों के द्वारा उत्पन्न,
(4) शतकुंभी - सौ सेलों या कुंभों से उत्पन्न,
(5) हृदनि - हृद या संरक्षित की हुई बिजली,
(6) अशनी - चुम्बकीय दण्ड से उत्पन्न।
इतनी वृहत जानकारी होने के बाद भी हम अपनी विधा को अनदेखा कर रहें हैं।
सुझाव:-
बैट्री के आविष्कार तथा बिजली के खोज का श्रेय वैदिक ऋषि अगस्त को दिया जाना उचित है, यह वैज्ञानिक सत्यनिष्ठा का परिचायक होगा।

।। मानस-गणित (Vedic- Ganit) ।।
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नोट :- उपरोक्त विषय व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है अपने आस-पास के पर्यावरण, ऋषि-मुनियों, ज्ञानियों तथा मनीषियों के लिखित तथा अलिखित श्रोत के आधार पर तैयार किया है।

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