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।। अयोध्या राम मंदिर - शहीदों की गाथा।।

अयोध्या का इतिहास -- जिसे पढ़कर आप रो पड़ेंगे। कृपया सच्चे हिन्दुओं की संतानें ही इस लेख को पढ़ें। जब बाबर दिल्ली की गद्दी पर आसीन हुआ उस समय जन्मभूमि सिद्ध महात्मा श्यामन...

।। पाक कौन है - असुर या पवित्र।।

।। पाक कौन है —???।। पाक एक असुर था जो कि जम्भासुर का भाइ था। देवासुरसंग्राम में अपने भाइ जम्भासुर का नारद जी के हाथों मृत्यु को प्राप्त होने के पश्चात देवताओं से बदला लेने के लिए पूरी शक्ति से आक्रमण किया था।  समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत को जब मोहिनी रुप धारी भगवान् श्री विष्णु जी देवताओं को पिला दिया तब उन्हें राहु-केतु के द्वारा पता चला कि सारा का सारा अमृत तो देवताओं को ही पिला दिया गया। फलतः सारे के सारे असुर देवताओं पर टूट पड़े तथा यहीं से "देवासुरसंग्राम" की शुरुआत हो गई। भगवान् श्री वेद व्यास जी द्वारा रचित  श्रीमद्भागवत महापुराण के   आठवें स्कंध  के ग्यारहवें अध्याय के श्लोक संख्या उन्नीसवें श्लोक से अट्ठाइसवें श्लोक तक के मुख्य रुप से तीन श्लोकों को समझने की जरूरत है—    जम्भं श्रुत्वा हतं तस्य ज्ञातयो नारदादृषेः ।    ननुचिश्च बलः पाकस्तत्रापेतुस्त्वरान्विताः।।                      —श्रीमद्भागवत - 8 / 11 / 19 अर्थ...

।। गाय - जल-संरक्षण।।

।। गाय - जल-संरक्षण।। प्रायः #गाय के जो भी चित्र देखे जाते हैं चाहें वो किसी भी प्रांत के हों, लगभग सभी में #गऊमाता के #खुरों के पास अर्थात चरणों में #जल या उस प्रांत की नदियां रहत...

Historical journey of Pi

Historical journey of Pi  पाई की ऐतिहासिक यात्रा  वृत के परिधि तथा व्यास के अनुपात को पाई के रूप व्यक्त किया जाता है जिसका स्थूल मान 3 है, परिमेय संख्या के रूप में मान   22 /7 तथा 3.1416 है तथा अपरिमेय संख्या के रूप में (10)^½ है। इसकी ऐतिहासिक यात्रा वैदिक काल से प्रारंभ होकर वर्तमान में शोधकर्ताओं के लिए और अधिक शोध करने की प्रेरणा देता रहता है। भारत तथा विश्व के सभी गणितज्ञों वृत के परिधि तथा व्यास के अनुपात में रुचि दिखाई तथा कुछ न कुछ नया खोजने का प्रयास किया है परन्तु भारतीय गणितज्ञों ने गणित के क्षेत्र में जो योगदान दिया वो अविस्मरणीय है। शुल्व-सूत्रों में वृत-संरचना के लिए अनेक नियम निर्धारित किये गये हैं। उनके अनेक विवरणों से पाई के अनेक प्रायः समतुल्य मान ध्वनित होते हैं। शुल्व-सूत्र के पूर्वोक्त उदाहरण से पाई का मान 3. 004 का अनुमान लगाया गया है। मानव शुल्बसूत्र  ( 1800 ई. पू.) से यह मान 3. 1604 द्योतित हुआ है। पाई का स्थूल मान 3 के लिए — यूपावटाः पदविष्कम्भाः। त्रिपदपरिणाहानि यूपोपराणि।।       ...