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Monday, 16 September 2019

भारतीय गणितज्ञ - भास्कराचार्य (प्रथम)

 September 16, 2019     भारतीय गणितज्ञ     No comments   

भारतीय गणितज्ञ - भास्कराचार्य (प्रथम)

भारत के प्राचीन गणितज्ञ भास्कराचार्य (प्रथम) का जन्म महाराष्ट्र राज्य के परभानी जिला के बोरी गाँव में 570 ई.  में हुआ था। भास्कराचार्य प्रथम को खगोलीय ज्ञान-विज्ञान का ज्ञान उन्हें अपने अपने पिता से विरासत में मिला और वे अपने आप को आर्यभट्ट का अनुयायी बताया। भास्कराचार्य (प्रथम) पहले गणितज्ञ थे जिन्होंने छोटे से वृत को शून्य के रुप में निरूपित किया तथा हिन्दू दाशमिक प्रणाली में गणितीय ज्ञान को लिखना प्रारंभ किया। कूटांकन प्रणाली के द्वारा संख्याओं को अंको के स्थान पर शब्द व प्रतीक द्वारा गणित को कलात्मक रुप में समझाया।
जैसे शून्य के लिए आकाश, पूर्ण इत्यादि, संख्या 1 के लिए रुप, पृथ्वी, चन्द्रमा इत्यादि संख्या 2 के लिए जुड़वाँ, पंख, युगल, नेत्र, हाथ इत्यादि, संख्या 3 के लिए लोक, गुण, राम इत्यादि, संख्या 4 के लिए युग, वेद इत्यादि, संख्या पांच के लिए 5 ज्ञानेन्द्रियों, प्राण, वाण इत्यादि संख्या 6 के लिए रस, ऋतु इत्यादि, संख्या 7 के लिए स्वर, अश्व इत्यादि, संख्या 8 के लिए वसु, हाथी, सर्प इत्यादि संख्या 9 के लिए नन्द, अंक, छिद्र इत्यादि संख्या 10 के लिए पंक्ति, दिशा इत्यादि आदि के रूप में दर्शाया है।
भास्कराचार्य (प्रथम) ने महाभास्करीय, आर्यभटीय भाष्य एवं लघु भास्करीय नामक दो ग्रन्थ लिखे। बाद में इनका अरबी भाषा में भी अनुवाद किया गया।
भास्कराचार्य ने अपने ग्रंथ आर्यभटीय भाष्य में पाई के मान को 10 के वर्ग मूल के रुप में माना है जो आज के मान के लगभग सन्निकट है।
महाभास्करीय ग्रंथ में त्रिकोणमितिय फलन ज्या य (sin x) का मान निकालने का एक परिमेय व्यजंक दिया है यह सूत्र रोचक तथा सरल है जिससे Sin x का पर्याप्त शुद्ध मान प्राप्त होता है।
भास्कराचार्य प्रथम ने अभाज्य संख्या P के लिए एक संबंध 1+(p-1) दिया जो अभाज्य संख्या P से भाज्य है।  बाद में अल-हथ्म (1000 ई.) फाइबोनेली ने भी इसे सत्यापित किया। आधुनिक गणित में इसे विलसन शेषफल प्रमेय (1770 ई.) के रूप में जानते हैं जिसे भास्कर प्रमेय के रूप में जानने की आवश्यकता है। 
गणितज्ञ भास्कराचार्य प्रथम एक प्रमेय दिया जिसे आजकल पेल समीकरण 8x²-1=y² के रूप में कहते है।
वर्ग-प्रकृति (Nx² ± c = y²) के तैयार करने तथा हल करने का श्रेय अंग्रेज़ी गणितज्ञ जॉन पेल (1610 ई. - 1685 ई. ) को 1732 ई. में स्वीस गणितज्ञ लियोनार्दो यूलियर के द्वारा  समीकरण का एक हल प्राप्त किया गया तथा समीकरण का श्रेय जॉन पेल को दिया गया।
परन्तु जाॅन पेल से काफी पहले भास्कराचार्य प्रथम ने एक प्रश्न खड़ा किया, कि वों संख्याएँ बताइए, जिसके वर्ग को 8 से गुणा कर एक जोड़ने पर दूसरी संख्या का वर्ग प्राप्त होता है।
जैसे 8x²-1=y² में x=1 एवं y=3 है, इसे सक्षेप में (x,y)= (1,3) लिखते है। इससे अन्य हल भी निकाले जा सकते है।
जैसे (x,y)=(6,17)
प्राचीन काल से ही भारत ज्ञान-विज्ञान का केन्द्र रहा है ऐसे अनेक महान खगोलविद, वैज्ञानिक, दार्शनिक एवं गणितज्ञ हुए है जिनके निश्छल प्रयास तथा कल्याणकारी अनुसंधान ने आधुनिक संसार रचना के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है जो वर्तमान पीढ़ी के लिए अमूल्य निधि है।

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