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।। वर्ग-प्रकृति (Intermediate Quadratic Equation) ।।

।। वर्ग-प्रकृति (Intermediate Quadratic Equation)।।
  
                        Nx² ± c = y²
मिथक :-
वर्ग-प्रकृति (Nx² ± c = y²) के तैयार करने तथा हल करने का श्रेय अंग्रेज़ी गणितज्ञ जॉन पेल (1610 ई. - 1685 ई. ) को 1732 ई. में स्वीस गणितज्ञ लियोनार्दो यूलियर के द्वारा  समीकरण का एक हल प्राप्त किया गया तथा समीकरण का श्रेय जॉन पेल को दिया गया।
सत्यता :-
सर्वप्रथम महान भारतीय गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त (598 ई. - 668 ई.) ने अपने ग्रंथ ब्रह्मस्फुट सिद्धांत में वर्ग-प्रकृति या दो चर वाले द्विघात अनिश्चित समीकरण ( Intermediate Quadratic Equations and Quadratic Equation in two variables) प्राप्त किया था।
ये समीकरण Nx² ± c = y² के आकार के होते हैं जहाँ N, c अचर तथा x, y चर संख्या के द्योतक हैं। इनमें N एक ऐसे पूर्णांक के द्योतक हैं जो वर्ग नहीं है तथा N > 0 है।
उदाहरण :-
        8x² + 1 = y² (Nx² ± c = y²)
इन समीकरणों में दो अज्ञात राशियां होती है। दो अज्ञात राशियों तथा एक समीकरण की स्थिति में सर्वदा अनिश्चित हल प्राप्त होते हैं। अतः ऐसे समीकरण के अनन्त परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं। जैसे y = 1 मान लेने पर x का मान—
    8 × 1² + 1 = x² = 8 + 1
    x² = 9, x = 3
उपरोक्त वर्ग-प्रकृति समीकरण के हल (x, y) = (1,3), (6,17), (35, 99), (204, 577), (1189, 3363),......
उदाहरण :- 2
        11x² + 1 = y²
समीकरण के संभावित हल (x, y) = (3, 10), (161 / 5, 534 / 5), .......
उदाहरण :- 3
        61x² + 1 = y²
समीकरण के सबसे छोटे हल x = 226153980 तथा y = 1766319049
सर्वप्रथम ब्रह्मगुप्त ने ब्रह्मस्फुट-सिद्धांत 18. 64 - 65 में इसे प्राप्त करने के नियम बताए गए हैं। उसके पश्चात भास्कराचार्य द्वितीय (1114 ई. - 1185 ई.) इसे भास्करिय बीजगणित में इस रीति से प्रकट किया है—
इष्टं ह्रस्वं तस्य वर्गः प्रकृत्या क्षुण्णो युक्तो वर्जितो वा स येन
अर्थात-
किसी भी इष्ट संख्या को ह्रस्व या कनिष्ठ (y) मानकर उसके वर्ग को प्रकृति (N) से गुणा करें। पुनः जिससे जोड़ने या घटने पर पूर्ण बन सके, उससे क्षेप (c) को जोड़ने या घटाने से ज्येष्ठ मूल (x) प्राप्त होता है।
भास्कराचार्य ने उपरोक्त उदाहरण को इस प्रकार प्रकट किया है—
को वर्गोऽष्टहतः सकैः स्याद् गणक उच्चताम
          (भास्करिय बीजगणितवर्ग-प्रकृति, श्लोक - 1)
हे गणक, वह किस संख्या का वर्ग है, जिसे 8 से गुणा करके 1 जोड़ देते हैं तो पूर्ण वर्ग बन जाता है।
यहां पूर्वोक्तानुसार y के लिए 1 मान कर उसे क्षेप (c) 1 से जोड़कर x² का मान 9 प्राप्त करते हैं। एक बार y का मान प्राप्त हो जाने पर इसके अन्य अनेकानेक मान तथा तदनुरूप x के अनेक मान प्राप्त किये जा सकते हैं। इसके अन्य मान प्राप्त करने के लिए एक नियम इस प्रकार है—
वज्राभ्यासौ ज्येष्ठलघ्वोस्तदैक्यम्।
          (भास्करिय बीजगणितवर्ग-प्रकृति, श्लोक - 2)
कनिष्ठ (y), ज्येष्ठ (x) तथा क्षेप (c) को क्रम में लिखकर उसके नीचे वही कनिष्ठ, ज्येष्ठ लिखें। पुनः इसके वज्रगुणन तथा इसके गुणनफलों के जोड़ से नवीन कनिष्ठ (y) प्राप्त करें।
ह्रस्व-लघ्वोराहतिश्च प्रकृत्या।
क्षण्णा ज्येष्टाभ्यासयुग् ज्येष्ठमूलम्।।
           (भास्करिय बीजगणितवर्ग-प्रकृति, श्लोक - 3)
साथ ही दोनों कनिष्ठों की प्रकृति (N) के साथ उनके (कनिष्ठों) के गुणन तथा दोनों ज्यष्ठों के गुणन से प्राप्त गुणनफलों का जोड़ ही नवीन ज्येष्ठ (x) होता है।
इस रीति से x तथा y प्राप्त होते हैं—
          x                                               y
(कनिष्ठ मूल)           (ज्येष्ठ मूल)
  a 1                                               b 3
  a' 1                                              b' 3 
    6                      17      3×1 + 3×1 = 6 नवीन कनिष्ठ (y)
                                 8×1×1 + 3×3 = 17 नवीन ज्येष्ठ (x)
  35                                                  99          17×1 + 6×3 = 35 (y)
                                                                        8× 1×6 + 3×17 = 99 (x)
1189                                           3363          99×6 + 35×17 = 1189 (y)
                                                                        8×6×35 + 17×99 = 3363 (x)
इस प्रकार x, y का मान प्राप्त करने के लिए यह सूत्र प्राप्त होता है— उपरोक्त सारिणी में निकटतम युगल के पहले वाले को a या b तथा दूसरे वाले को a' तथा b' मानने पर—
  y = a b' + a' b
  x = b b' + N a a'
प्रस्तुत उदाहरण 8y² + 1 = x² में प्रस्तुत सूत्र की संक्रिया द्वारा y तथा x का मान प्राप्त करते हैं—
         8y² + 1 = x²
=> 8×(17×1+6×3)² + 1  = (3×17 + 8×1×6)²
=> 8×(17+18)² + 1         = (51 + 48)²
=> 8× 35² +1                   = 99²
=> 8×1225 + 1                = 99²
=> 9801                           = 9801
अतः y² = 1225             अतः x² = 9801
साथ ही ब्रह्मगुप्त के अन्य नियम के अनुसार x, y के अन्य मान प्राप्त करने के लिए सूत्र इस प्रकार है—
y = 2pq
x = q² + Np²
प्रस्तुत उदाहरण में पूर्व नियमानुसार y° = 1, x° = 3
(I) यदि p = 1 तथा q = 3 है तो —> y' = 6, x' = 17
क्योंकि 2×1×3 = 6 तथा 3² + 8×1² = 17
(II) यदि p = 6 तथा q = 17 है तो —> y'' = 204 , x''= 577
क्योंकि 2×6×17 = 204 तथा 17² + 8×6² = 577
प्रस्तुत (II) उदाहरण के अनुसार x तथा y का यह मान प्राप्त होता है—
      8(y'')² + 1 = (x'')²
=> 8×(2×17×6)² + 1 = (17² + 8×6²)²
=> 8×(204)² + 1        = (289 + 8×36)²
=> 8× 41616 +1        = (289 +288)²= 577²
=> 332929                 = x² = 332929
अतः (y'')² = 41616      अतः (x'')² = 332929
        y'' = 204                        x'' = 577
इस उदाहरण को इस सूत्र से प्रकट कर सकते हैं—
y'' = 2y'x'
x'' = N(y')² + (x')²
अभ्यास:-
एकादशगुणः को वा वर्गः सकैः कृतिर्भवेत्।
           (भास्करिय बीजगणितवर्ग-प्रकृति)
अर्थात:-
वह किस संख्या का वर्ग है, जिसे 11 से गुणा करके 1 जोड़ देते हैं, तो पूर्ण वर्ग बन जाता है।
सुझाव :-
वर्ग-प्रकृति या दो चर वाले द्विघात अनिश्चित समीकरण ( Intermediate Quadratic Equations and Quadratic Equation in two variables) का श्रेय   महान भारतीय गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त को देना उचित होगा, यह वैज्ञानिक सत्यनिष्ठा का परिचायक होगा।
।। मानस-गणित (Vedic- Ganit) ।।
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नोट :- उपरोक्त विषय व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है अपने आस-पास के पर्यावरण, ऋषि-मुनियों, ज्ञानियों तथा मनीषियों के लिखित तथा अलिखित श्रोत के आधार पर तैयार किया

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