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Monday, 24 October 2016

।। नाव में लोकतंत्र।।

 October 24, 2016     No comments   

।। नाव में लोकतंत्र।।
एक समय की बात है एक राजा अपने कुत्ते के साथ नाव में यात्रा कर रहा था । उस नाव में अन्य यात्रियों के साथ एक महात्मा भी थे ।
.कुत्ते ने कभी नौका में सफर नहीं किया था, इसलिए वह अपने को सहज महसूस नहीं कर पा रहा था ।
वह उछल-कूद कर रहा था और किसी को चैन से नहीं बैठने दे रहा था ।
.नाव का मल्लाह उसकी उछल-कूद से परेशान था कि ऐसी स्थिति में यात्रियों की हड़बड़ाहट से नाव डूब जाएगी ।
वह भी डूबेगा और दूसरों को भी ले डूबेगा ।परन्तु कुत्ता अपने स्वभाव के कारण उछल-कूद में लगा था ।
ऐसी स्थिति देखकर राजा भी गुस्से में था ।परंतु कुत्ते को सुधारने का कोई उपाय उन्हें समझ में नहीं आ रहा था ।नाव में बैठे महात्मा से रहा नहीं गया ।
वह राजा के पास गया और बोला - "महाराज ! अगर आप अनुमति दें तो मैं इस कुत्ते को भीगी बिल्ली बना सकता हूँ ।" राजा ने तत्काल अनुमति दे दी ।
महात्मा ने दो यात्रियों का सहारा लिया और उस कुत्ते को नाव से उठाकर नदी में फेंक दिया । कुत्ता तैरता हुआ नाव के खूंटे को पकड़ने लगा । उसको अब अपनी जान के लाले पड़ रहे थे । कुछ देर बाद महात्मा ने उसे खींचकर नाव में चढ़ा लिया ।
तत्पश्चात.......
वह कुत्ता चुपके से जाकर एक कोने में बैठ गया ।नाव के यात्रियों के साथ राजा को भी उस कुत्ते के बदले व्यवहार पर बड़ा आश्चर्य हुआ ।
राजा ने महात्मा से पूछा - "यह पहले तो उछल-कूद और हरकतें कर रहा था, अब देखो कैसे यह पालतू बकरी की तरह बैठा है ?"
महात्मा बोले - महाराज, "पानी की कद्र वही करता है जो कभी रेगिस्तान से गुजरा हो, खुद कष्ट का स्वाद चखे बिना किसी को दूसरे की विपत्ति का अहसास नहीं होता है । इस कुत्ते को जब मैंने पानी में फेंक दिया तो इसे पानी की ताकत और नाव की उपयोगिता समझ में आ गयी ।"
निष्कर्ष :-  भारत में रहकर भारत को गाली देने वाले कुत्तों के लिए समर्पित ....
वैधानिक चेतावनी :- उपरोक्त विषय का किसी जीवित अथवा मृत व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है यदि कोई संबंध मिलता है तो इसे महज एक संयोग कहा जायेगा....
सधन्यवाद

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